भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र 2026 में एक नए युग में प्रवेश कर गया है। इसरो की उपलब्धियों के साथ-साथ अब निजी कंपनियां भी अंतरिक्ष में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉस्मोस और पिक्सल जैसी स्टार्टअप्स ने भारत को वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना दिया है।
इसरो का चंद्रयान कार्यक्रम और गगनयान मिशन वैश्विक ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। बजट 2026 में स्पेस सेक्टर के लिए विशेष आवंटन किया गया है और डीप-टेक रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए 2.2 बिलियन डॉलर रखे गए हैं।
भारत ने सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए भी नियम तय किए हैं जिससे स्टारलिंक और जियो सैटेलाइट जैसी सेवाएं ग्रामीण भारत तक ब्रॉडबैंड पहुंचा सकें। कम्युनिकेशन, रिमोट सेंसिंग और नेविगेशन सैटेलाइट्स में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इन-स्पेस एजेंसी ने निजी कंपनियों को अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने की अनुमति दी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक भारत का स्पेस सेक्टर 44 बिलियन डॉलर का होगा जो वर्तमान में लगभग 8 बिलियन डॉलर है।