साल 2026 में भारत वैश्विक वेलनेस टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। ऋषिकेश, केरल और हिमाचल प्रदेश जैसे गंतव्य दुनियाभर के स्वास्थ्य-सजग पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। योग, ध्यान और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक भारतीय पद्धतियां अब आधुनिक वेलनेस रिट्रीट्स का अभिन्न हिस्सा बन गई हैं।
वैश्विक वेलनेस टूरिज्म बाजार 2027 तक 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है और भारत इस विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। डिजिटल डिटॉक्स रिट्रीट्स, अल्कोहल-फ्री ट्रैवल और होलिस्टिक हीलिंग प्रोग्राम्स की मांग में भारी वृद्धि हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की खासियत यह है कि यहां अस्थायी राहत नहीं बल्कि जड़ से उपचार पर ध्यान दिया जाता है। आयुर्वेद की दोष-आधारित पद्धति से हर पर्यटक को व्यक्तिगत कार्यक्रम मिलता है। मिलेनियल और जेन जी पीढ़ी सोबर ट्रैवल की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है।
भारत सरकार भी इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है और कई नई वेलनेस पर्यटन योजनाएं शुरू की गई हैं। आने वाले वर्षों में भारत वेलनेस टूरिज्म में विश्व में अग्रणी स्थान प्राप्त करने की राह पर है।