वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 की घोषणा की है जिसमें 40,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह मिशन भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
आईएसएम 2.0 का फोकस सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री का घरेलू उत्पादन, फुल-स्टैक भारतीय आईपी डिजाइन और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर है। पहले चरण में 76,000 करोड़ रुपये के साथ 10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का 11 बिलियन डॉलर का मेगा-फैब धोलेरा में निर्माणाधीन है जो 28 नैनोमीटर और 55 नैनोमीटर लॉजिक चिप्स का उत्पादन करेगा। माइक्रोन टेक्नोलॉजी का 2.75 बिलियन डॉलर का सानंद संयंत्र पूरी क्षमता से काम कर रहा है।
शक्ति और वेगा जैसे स्वदेशी प्रोसेसर भी एआई हार्डवेयर विकास में योगदान दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2028 तक भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग बाजार का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर सकता है।